शेयर बाजार सोमवार को भारी नुकसान में रहा। सेंसेक्स 369 अंक गिरकर 35657 पर बंद हुआ। निफ्टी की क्लोजिंग 119 प्वाइंट की गिरावट के साथ 10,662 पर हुई। बैंकिंग, ऑटो और मेटल शेयरों में बिकवाली का दबाव ज्यादा रहा। ब्रोकर्स का कहना है कि कुछ बड़ी कंपनियों के तिमाही नतीजे कमजोर रहने और अमेरिका-चीन के बीच व्यापार वार्ता को लेकर अनिश्चितता की वजह से निवेशकों के मन में चिंता है।
इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस में 6.5% गिरावट
सेंसेक्स के 30 में से 23 और निफ्टी के 50 में से 36 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। बीएसई पर 19 में से 17 सेक्टर इंडेक्स नुकसान में रहे। फाइनेंस इंडेक्स 2.1% लुढ़क गया।
एनएसई पर अडानी पोर्ट्स का शेयर 12.53% गिरावट के साथ बंद हुआ। इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस का शेयर 6.51% नुकसान में रहा। कारोबार के दौरान वोडाफोन-आईडिया के शेयर की क्लोजिंग 4.87% नीचे हुई। इंट्रा-डे में यह 13% गिरकर 28.45 रुपए के अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया था।
जी मीडिया के शेयर में 19% गिरावट
एस्सेल ग्रुप की कंपनी जी एंटरटेनमेंट का शेयर 16%, एस्सेल प्रोपैक 13.5% और डिश टीवी 8% फायदे में रहा। शुक्रवार को शेयर 33% गिरने के बाद एस्सेल ग्रुप ने रविवार को कहा कि कर्जदाता प्रमोटरों को डिफॉल्टर घोषित नहीं करेंगे। प्रमोटरों ने कर्ज लेने के लिए बैंकों, एनबीएफसी और म्यूचुअल फंडों के पास शेयर गिरवी रखे हैं। इस ऐलान से शेयर में तेजी आई। हालांकि, ग्रुप की 2 अन्य कंपनियों जी मीडिया ने 19% और जी लर्न ने 6% नीचे कारोबार खत्म किया।
शेयर बाजार में लगातार दूसरे सत्र में गिरावट
सेंसेक्स शुक्रवार को 169 अंक की गिरावट के साथ 36,025.54 पर बंद हुआ था। निफ्टी की क्लोजिंग 69.25 प्वाइंट नीचे 10,780.55 पर हुई थी। उस दिन विदेशी निवेशकों ने 689.28 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे थे। घरेलू निवेशकों ने 147.35 करोड़ की बिकवाली की थी।
मैच जीतने के बाद जोकोविच ने नडाल की तारीफ करते हुए कहा कि चोट से वापस आकर खेलना बेहद कठिन है। आपने सभी को फाइटिंग स्पिरिट के बारे में सिखाया, उसके लिए बहुत शुक्रिया। पिछले चार में से तीन टाइटल जीतना बेहतरीन अनुभव है। जोकोविच ने अपनी टीम और परिवार का भी शुक्रिया जताया।
वेस्टइंडीज ने इंग्लैंड को तीन टेस्ट की सीरीज के पहले मैच में 381 रन से हरा दिया। इस मैच में विंडीज के लिए कप्तान जेसन होल्डर ने दोहरा शतक लगाया और दो विकेट भी लिए। उन्हें मैन ऑफ द मैच चुना गया था। इस प्रदर्शन के बाद वे आईसीसी रैंकिंग में नंबर-1 ऑलराउंडर बन गए। वे गारफील्ड सोबर्स के बाद इस पायदान पर पहुंचने वाले अपने देश के पहले ऑलराउंडर बने। सोबर्स 1974 में नंबर-1 ऑलराउंडर थे।
होल्डर ने करियर की सर्वश्रेष्ठ 440 रेटिंग अंक हासिल किए। रैंकिंग में बांग्लादेश के शाकिब अल हसन दूसरे पायदान पर हैं। हसन के 415 अंक हैं। तीसरे स्थान पर भारत के रविंद्र जडेजा हैं। उनके 387 अंक हैं।
सोबर्स के जमाने में विपक्षी टीम के स्तर और अन्य खिलाड़ियों के आंकड़े को ध्यान में नहीं रखा जाता था। रैंकिंग प्रणाली नहीं थी। पूर्व क्रिकेटरों की राय और प्रदर्शन के आधार पर सोबर्स को सर्वश्रेष्ठ ऑलराउंडर कहा जाता था। वे 1974 में संन्यास लेने के समय टॉप पर थे।
Monday, January 28, 2019
Thursday, January 17, 2019
केरलः बिशप मुलक्कल के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने वाली ननों का ट्रांसफ़र आदेश मानने से इनकार
केरल में बलात्कार के आरोप में घिरे जालंधर के बिशप फ़्रैंको मुलक्कल का विरोध करने वाली पांच में से चार ननों को कोट्टयम ज़िले में उनके कॉन्वेंट छोड़ने का निर्देश दिया गया है.
लेकिन, ये नन पूरी तरह से निडर हैं. इनमें से एक नन सिस्टर अनुपमा ने बीबीसी को बताया, "हम डरे हुए नहीं हैं. अगर वे हमें जाने के लिए कह रहे हैं तो हम नहीं जाएंगे. यदि वे हमें बर्खास्त कर देते हैं तो उन्हें करने दें. कोई बात नहीं. हम यहीं रहेंगे."
सिस्टर अनुपमा, सिस्टर एल्फी, सिस्टर जोसेफ़िन और सिस्टर एनसिटा ने कोच्चि में एक सार्वजनिक मंच से जालंधर के बिशप फ़्रैंको मुलक्कल के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की थी जिससे 'सेव आवर सिस्टर्स' आंदोलन का नाम दिया गया था.
22 सितंबर को बिशप फ़्रैंको मुलक्कल को 30 घंटे की पूछताछ का साथ जालंधर से गिरफ़्तार किया गया था. बिशप फ़्रैंको पर साल 2014 से 2016 के बीच एक नन के साथ बलात्कार करने का आरोप है.
सिस्टर एनसिटा को केरल के कुन्नूर, सिस्टर जोसफ़ी को झारखंड, सिस्टर एल्फ़ी को बिहार और सिस्टर अनुपमा का तबादला पंजाब में किया गया है.
इन चारों ननों को लगभग एक जैसी ही चिट्ठी दी गई है. मिशनरी जीसस की सुपीरियर जनरल और मदर सुपीरियर रेजिना कदमथोट्टु ने बीबीसी से कहा, 'सच जनता के सामने आ रहा है'.
ननों का मानना है कि ये ट्रांसफ़र का फ़ैसला उनपर एक तरह का दबाव बनाने का तरीका है जिससे वे रेप का शिकार हुई नन को बिशप फ़्रैंको मुलक्कल के खिलाफ़ केस वापस लेने के लिए तैयार करें.
सिस्टर अनुपमा ने कहा, '' हम इस केस की चश्मदीद हैं. हमारे लिए हमेशा केस के लिए सफ़र करना मुश्किल होगा. ऐसा करना हमारे ऊपर केस को वापस लेने का दबाव बनाने जैसा है. ''
फ़ादर अगस्टीन को चर्च ने कहा है कि या तो वे 'सेव ऑर सिस्टर' आंदोलन से ख़ुद को अलग कर लें या फ़िर कार्रवाई झेलने को तैयार रहें.
उन्होंने बीबीसी हिंदी से कहा, ''ये सिस्टर केस की गवाह हैं. उन्हें इस तरह अलग करना प्रतिशोध से भरा काम है. ये साफ़ संदेश दिया जा रहा है कि चर्च ऐसे विरोधों को बर्दाश्त नहीं करेगा. और ऐसा तब किया जा रहा है जब पोप फ़्रांसिस ने अपने क्रिसमस संबोधन में साफ़ कहा था कि चर्च यौन उत्पीड़न क़तई बर्दाश्त नहीं करेगा.''
कैथोलिक बिशप काउंसिल फ़ॉर वुमेन की पूर्व कमिश्नर वर्जीनिया सलडान्हा ने कहा, ''वे लोग अपने पावर का इस्तेमाल ख़ुद को बचाने के लिए कर रहे हैं.
ननों की प्रमुख 'मदर सुपीरियर' जिन्होंने ट्रांसफ़र के आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, वो ऊंचे पदों पर बैठे लोगों के दबाव में काम कर रही हैं. मदर सुपीरियर बिशप मुलक्कल के अंतर्गत काम कर रही हैं और वो जो भी कर रही हैं वो बिशप को बचाने के लिए कर रही हैं. ''
''मदर सुपीरियर जो भी कर रही हैं वो महिला विरोधी है. लेकिन पितृसत्तात्मक समाज में ऐसा ही होता है. जहां महिलाएं महिला के मुकाबले पुरूष को वरीयता देती हैं.''
लेकिन, ये नन पूरी तरह से निडर हैं. इनमें से एक नन सिस्टर अनुपमा ने बीबीसी को बताया, "हम डरे हुए नहीं हैं. अगर वे हमें जाने के लिए कह रहे हैं तो हम नहीं जाएंगे. यदि वे हमें बर्खास्त कर देते हैं तो उन्हें करने दें. कोई बात नहीं. हम यहीं रहेंगे."
सिस्टर अनुपमा, सिस्टर एल्फी, सिस्टर जोसेफ़िन और सिस्टर एनसिटा ने कोच्चि में एक सार्वजनिक मंच से जालंधर के बिशप फ़्रैंको मुलक्कल के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की थी जिससे 'सेव आवर सिस्टर्स' आंदोलन का नाम दिया गया था.
22 सितंबर को बिशप फ़्रैंको मुलक्कल को 30 घंटे की पूछताछ का साथ जालंधर से गिरफ़्तार किया गया था. बिशप फ़्रैंको पर साल 2014 से 2016 के बीच एक नन के साथ बलात्कार करने का आरोप है.
सिस्टर एनसिटा को केरल के कुन्नूर, सिस्टर जोसफ़ी को झारखंड, सिस्टर एल्फ़ी को बिहार और सिस्टर अनुपमा का तबादला पंजाब में किया गया है.
इन चारों ननों को लगभग एक जैसी ही चिट्ठी दी गई है. मिशनरी जीसस की सुपीरियर जनरल और मदर सुपीरियर रेजिना कदमथोट्टु ने बीबीसी से कहा, 'सच जनता के सामने आ रहा है'.
ननों का मानना है कि ये ट्रांसफ़र का फ़ैसला उनपर एक तरह का दबाव बनाने का तरीका है जिससे वे रेप का शिकार हुई नन को बिशप फ़्रैंको मुलक्कल के खिलाफ़ केस वापस लेने के लिए तैयार करें.
सिस्टर अनुपमा ने कहा, '' हम इस केस की चश्मदीद हैं. हमारे लिए हमेशा केस के लिए सफ़र करना मुश्किल होगा. ऐसा करना हमारे ऊपर केस को वापस लेने का दबाव बनाने जैसा है. ''
फ़ादर अगस्टीन को चर्च ने कहा है कि या तो वे 'सेव ऑर सिस्टर' आंदोलन से ख़ुद को अलग कर लें या फ़िर कार्रवाई झेलने को तैयार रहें.
उन्होंने बीबीसी हिंदी से कहा, ''ये सिस्टर केस की गवाह हैं. उन्हें इस तरह अलग करना प्रतिशोध से भरा काम है. ये साफ़ संदेश दिया जा रहा है कि चर्च ऐसे विरोधों को बर्दाश्त नहीं करेगा. और ऐसा तब किया जा रहा है जब पोप फ़्रांसिस ने अपने क्रिसमस संबोधन में साफ़ कहा था कि चर्च यौन उत्पीड़न क़तई बर्दाश्त नहीं करेगा.''
कैथोलिक बिशप काउंसिल फ़ॉर वुमेन की पूर्व कमिश्नर वर्जीनिया सलडान्हा ने कहा, ''वे लोग अपने पावर का इस्तेमाल ख़ुद को बचाने के लिए कर रहे हैं.
ननों की प्रमुख 'मदर सुपीरियर' जिन्होंने ट्रांसफ़र के आदेश पर हस्ताक्षर किए हैं, वो ऊंचे पदों पर बैठे लोगों के दबाव में काम कर रही हैं. मदर सुपीरियर बिशप मुलक्कल के अंतर्गत काम कर रही हैं और वो जो भी कर रही हैं वो बिशप को बचाने के लिए कर रही हैं. ''
''मदर सुपीरियर जो भी कर रही हैं वो महिला विरोधी है. लेकिन पितृसत्तात्मक समाज में ऐसा ही होता है. जहां महिलाएं महिला के मुकाबले पुरूष को वरीयता देती हैं.''
Wednesday, January 9, 2019
शाह फ़ैसलः 'मैं कश्मीर की राजनीति का हिस्सा बनना चाहूंगा'
साल 2009 में कश्मीर के सिविल सेवा परीक्षा टॉपर आईएएस अधिकारी शाह फ़ैसल ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. उन्होंने ट्विटर के ज़रिए अपने इस्तीफ़े की जानकारी दी.
अपने इस्तीफ़े पर शाह फ़ैसल ने श्रीनगर में बीबीसी संवाददाता रियाज़ मसरूर से विस्तार से बातचीत की और इस बात के संकेत दिए कि वे राजनीति में क़दम रखने की योजना बना रहे हैं.
''मैंने कभी नहीं कहा कि नौकरी नहीं छोड़ सकता. मेरे लिए हमेशा नौकरी एक इंस्ट्रूमेंट था, लोगों की ख़िदमत करने का. अवाम की ख़िदमत कई तरीक़ों से हो सकती है, जो भी पब्लिक सर्विस में होते हैं, वो सब लोगों की ख़िदमत करते हैं. पिछले साल-दो साल से हमने जिस तरह से मुल्क में हालात देखे, जम्मू-कश्मीर में देखे. कश्मीर में हत्याओं का एक सिलसिला देखने को मिला.''
''हिंदू-मुस्लिम के बीच बढ़ते अंतर को देखा. रोंगटे खड़े करने वाले वीडियो हमने देखे. गौरक्षा के नाम पर उपद्रव देखने को मिला. ये तो कभी देखने को नहीं मिला था. अभिव्यक्ति की आज़ादी पर अंकुश की कोशिशें हमने देखीं. ''
'ऐसे में एक ऑफ़िसर का नौकरी में रहना संभव नहीं था. और समाज के नैतिक सवालों से अलग हो कर रहना और उनपर रिएक्ट नहीं करना, मेरे लिए संभव नहीं था. मैंने चीज़ों पर पहले भी बोला है, लेकिन अब वो वक़्त आ चुका था कि इस खुलकर बोलने की ज़रूरत थी, ये काम नौकरी छोड़कर ही किया जा सकता था.''
''सिविल सर्विस कोड की बात जब होती है, तो उसके मुताबिक़ अभिव्यक्ति की आज़ादी थोड़ी प्रभावित होती है. राजनीति पब्लिक सर्विस का एक्सटेंशन है. अब तक मैं राजनेताओं के साथ काम कर रहा था. ''
''अब ख़ुद पॉलिटिक्स कर सकता हूं, एक्टिविस्ट बन सकता हूं. अवाम की बात करना और अवाम का काम करना, पॉलिटिक्स ये दो चीज़ें मुहैया कराती हैं. मैं सोच रहा हूं कि अगर मुझे मौक़ा मिलता है तो पॉलिटिक्स में जा सकता हूं. ''
क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टी में शामिल होने पर विचार
''अभी ये तय नहीं है कि किस पार्टी से जुड़ूँगा. हर पार्टी की अपनी लीगेसी है. अगर कभी पॉलिटिक्स में गया तो उस पार्टी से जुड़ूँगा जो मुझे राज्य के इस मौजूदा हालात पर खुलकर बात करने की आज़ादी देगी. ''
''मैं ऐसी पार्टी का हिस्सा बनना चाहूँगा जिसमें मुझे अल्पसंख्यकों के साथ, कश्मीरियों के साथ हो रही राजनीति को लेकर खुलकर बात करने का मौक़ा मिले. मैं अपने विकल्पों के बारे में सोच रहा हूं और जल्द ही इसपर फ़ैसला करूंगा.''
ये पढ़ेंः कश्मीरी लड़कियों में सिविल सेवा का बढ़ता क्रेज़
''मेरे लिए रीजनल पार्टी में जाना ज़्यादा सही होगा. मैं कश्मीर की बात करना चाहता हूं. हमें समझना होगा कि संसद की मुहर के बिना कोई भी तब्दीली नहीं की जा सकती. मैं संसद में कश्मीरियों की आवाज़ बनना चाहता हूं.''
''कई लोग मुझसे कह रहे हैं कि नई पार्टी बनानी चाहिए लेकिन मुझे लगता है कि अभी राज्य को एकता की ज़रूरत है. जितनी ज़्यादा पार्टियां बनेंगी उतना ही ज़्यादा जनमत विभाजित होगा.''
ये ज़रूरी नहीं कि आप एक नौकरी में 30 साल या 50 साल तक रहें. 10 साल में मुझे आईएएस रहते हुए बेहतरीन अवसर मिले. मैंने संस्थाओं को समझा, लोगों के लिए काम किया, प्रक्रिया समझने का मौक़ा मिला. दुनिया में हर कोई नौकरी बदलता है. मैंने इस लिए ये पद छोड़ा क्योंकि पद पर रहते हुए कई मुद्दों पर बात करना मेरे लिए ठीक नहीं होता.''
''अब तक हमने झूठ की राजनीति देखी है, मैं कुछ छोड़कर राजनीति में आ रहा हूं. मैं अपने आदर्शों को अपने विजन को राजनीति में लाना चाहता हूं अगर ऐसा मौक़ा नहीं मिल पाता है तो राजनीति मेरे लिए आख़िरी पड़ाव नहीं है.''
''साख की बात करूं तो राज्य में अगर मैं राजनीति का हिस्सा नहीं बनूंगा तो कोई और बनेगा, कश्मीर को बेहतर लोगों और नौजवानों की ज़रूरत है. यही सोचकर मैं राजनीति में क़दम रखने की सोच रहा हूं.''
''मौजूदा कश्मीर में लोगों के बीच एक कंफ़्यूजन की स्थिति है. ये बेहद ज़रूरी है कि लोगों में यक़ीन लाया जाए कि ये लोग कश्मीर की बात करेंगे. जबतक मुख्य धारा की राजनीतिक पार्टियां सच नहीं बोलना शरू करेंगी तब तक कश्मीर में उनका भविष्य धुंधला रहेगा.''
अपने इस्तीफ़े पर शाह फ़ैसल ने श्रीनगर में बीबीसी संवाददाता रियाज़ मसरूर से विस्तार से बातचीत की और इस बात के संकेत दिए कि वे राजनीति में क़दम रखने की योजना बना रहे हैं.
''मैंने कभी नहीं कहा कि नौकरी नहीं छोड़ सकता. मेरे लिए हमेशा नौकरी एक इंस्ट्रूमेंट था, लोगों की ख़िदमत करने का. अवाम की ख़िदमत कई तरीक़ों से हो सकती है, जो भी पब्लिक सर्विस में होते हैं, वो सब लोगों की ख़िदमत करते हैं. पिछले साल-दो साल से हमने जिस तरह से मुल्क में हालात देखे, जम्मू-कश्मीर में देखे. कश्मीर में हत्याओं का एक सिलसिला देखने को मिला.''
''हिंदू-मुस्लिम के बीच बढ़ते अंतर को देखा. रोंगटे खड़े करने वाले वीडियो हमने देखे. गौरक्षा के नाम पर उपद्रव देखने को मिला. ये तो कभी देखने को नहीं मिला था. अभिव्यक्ति की आज़ादी पर अंकुश की कोशिशें हमने देखीं. ''
'ऐसे में एक ऑफ़िसर का नौकरी में रहना संभव नहीं था. और समाज के नैतिक सवालों से अलग हो कर रहना और उनपर रिएक्ट नहीं करना, मेरे लिए संभव नहीं था. मैंने चीज़ों पर पहले भी बोला है, लेकिन अब वो वक़्त आ चुका था कि इस खुलकर बोलने की ज़रूरत थी, ये काम नौकरी छोड़कर ही किया जा सकता था.''
''सिविल सर्विस कोड की बात जब होती है, तो उसके मुताबिक़ अभिव्यक्ति की आज़ादी थोड़ी प्रभावित होती है. राजनीति पब्लिक सर्विस का एक्सटेंशन है. अब तक मैं राजनेताओं के साथ काम कर रहा था. ''
''अब ख़ुद पॉलिटिक्स कर सकता हूं, एक्टिविस्ट बन सकता हूं. अवाम की बात करना और अवाम का काम करना, पॉलिटिक्स ये दो चीज़ें मुहैया कराती हैं. मैं सोच रहा हूं कि अगर मुझे मौक़ा मिलता है तो पॉलिटिक्स में जा सकता हूं. ''
क्षेत्रीय राजनीतिक पार्टी में शामिल होने पर विचार
''अभी ये तय नहीं है कि किस पार्टी से जुड़ूँगा. हर पार्टी की अपनी लीगेसी है. अगर कभी पॉलिटिक्स में गया तो उस पार्टी से जुड़ूँगा जो मुझे राज्य के इस मौजूदा हालात पर खुलकर बात करने की आज़ादी देगी. ''
''मैं ऐसी पार्टी का हिस्सा बनना चाहूँगा जिसमें मुझे अल्पसंख्यकों के साथ, कश्मीरियों के साथ हो रही राजनीति को लेकर खुलकर बात करने का मौक़ा मिले. मैं अपने विकल्पों के बारे में सोच रहा हूं और जल्द ही इसपर फ़ैसला करूंगा.''
ये पढ़ेंः कश्मीरी लड़कियों में सिविल सेवा का बढ़ता क्रेज़
''मेरे लिए रीजनल पार्टी में जाना ज़्यादा सही होगा. मैं कश्मीर की बात करना चाहता हूं. हमें समझना होगा कि संसद की मुहर के बिना कोई भी तब्दीली नहीं की जा सकती. मैं संसद में कश्मीरियों की आवाज़ बनना चाहता हूं.''
''कई लोग मुझसे कह रहे हैं कि नई पार्टी बनानी चाहिए लेकिन मुझे लगता है कि अभी राज्य को एकता की ज़रूरत है. जितनी ज़्यादा पार्टियां बनेंगी उतना ही ज़्यादा जनमत विभाजित होगा.''
ये ज़रूरी नहीं कि आप एक नौकरी में 30 साल या 50 साल तक रहें. 10 साल में मुझे आईएएस रहते हुए बेहतरीन अवसर मिले. मैंने संस्थाओं को समझा, लोगों के लिए काम किया, प्रक्रिया समझने का मौक़ा मिला. दुनिया में हर कोई नौकरी बदलता है. मैंने इस लिए ये पद छोड़ा क्योंकि पद पर रहते हुए कई मुद्दों पर बात करना मेरे लिए ठीक नहीं होता.''
''अब तक हमने झूठ की राजनीति देखी है, मैं कुछ छोड़कर राजनीति में आ रहा हूं. मैं अपने आदर्शों को अपने विजन को राजनीति में लाना चाहता हूं अगर ऐसा मौक़ा नहीं मिल पाता है तो राजनीति मेरे लिए आख़िरी पड़ाव नहीं है.''
''साख की बात करूं तो राज्य में अगर मैं राजनीति का हिस्सा नहीं बनूंगा तो कोई और बनेगा, कश्मीर को बेहतर लोगों और नौजवानों की ज़रूरत है. यही सोचकर मैं राजनीति में क़दम रखने की सोच रहा हूं.''
''मौजूदा कश्मीर में लोगों के बीच एक कंफ़्यूजन की स्थिति है. ये बेहद ज़रूरी है कि लोगों में यक़ीन लाया जाए कि ये लोग कश्मीर की बात करेंगे. जबतक मुख्य धारा की राजनीतिक पार्टियां सच नहीं बोलना शरू करेंगी तब तक कश्मीर में उनका भविष्य धुंधला रहेगा.''
Wednesday, January 2, 2019
हिंदू राम मंदिर के लिए अंनत काल तक प्रतीक्षा नहीं कर सकता: विहिप
विश्व हिंदू परिषद ने कहा है कि राम मंदिर को लेकर हिंदू समाज अनंत काल तक न्यायालय के फ़ैसले का इंतज़ार नहीं कर सकता है और भव्य मंदिर निर्माण का रास्ता साफ़ करने के लिए क़ानून बनाया जाना चाहिए.
विहिप की ये प्रतिक्रिया प्रधानमंत्री के उस बयान के बाद आई है जिसमें नरेंद्र मोदी ने कहा है कि राम मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश की बात क़ानूनी प्रक्रिया के ख़ात्मे के बाद ही सोची जा सकती है.
समाचार एजेंसी एएनआई को दिए गए एक इंटरव्यू में नरेंद्र मोदी ने कहा है, "क़ानूनी प्रक्रिया समाप्त होने दीजिए. क़ानूनी प्रक्रिया समाप्त होने के बाद सरकार के तौर पर हमारी जो भी ज़िम्मेदारी है, हम उसके लिए पूरी कोशिश करेंगे."
नरेंद्र मोदी के साक्षात्कार के ख़त्म होने के कुछ ही देर बार आरएसएस के सह सरकार्यवाहक दत्तात्रेय होसाबले ने बयान जारी कर कहा कि जनता सरकार से उम्मीद करती है कि वो राम मंदिर पर किए गए वायदे को अपने इसी कार्यकाल में पूरा करे.
होसाबले ने मंगलवार को जारी लिखित बयान में कहा है कि 2014 में भारतीय जनता पार्टी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में राम मंदिर निर्माण के लिए संविधान के दायरे के भीतर सभी संभावनाओं को तलाशने का वायदा किया था और जनता ने बीजेपी पर भरोसा कर उसे पूर्ण बहुमत दिया इसलिए सरकार को अपने इसी कार्यकाल में इसे पूरा करना चाहिए.
हालांकि आरएसएस के इस बयान में मंदिर निर्माण के लिए क़ानून की बात नहीं की गई है लेकिन संघ प्रमुख ख़ुद और संगठन के दूसरे बड़े अधिकारी सुरेश सोनी अयोध्या में भव्य मंदिर के निर्माण के लिए अध्यादेश या संसद में क़ानून लाने की बात कहते रहे हैं.
आरएसएस के बयान के कुछ घंटो बाद विहिप ने इस मामले पर दिल्ली में एक प्रेस वार्ता की और क़ानून लाने की बात को फिर से दोहराया.
जब बीबीसी ने विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार से पूछा कि बीजेपी-आरएसएस-विहिप इसी मामले पर अलग-अलग तरह की बातें क्यों कर रहे हैं? क्या ये अयोध्या मुद्दे को गर्म रखने की कोशिश है?
आलोक कुमार ने जवाब में कहा कि नहीं ये कोई लिखित सक्रिप्ट का हिस्सा नहीं है और चूंकि वो राम मंदिर आंदोलन से दशकों से जुड़े रहे हैं तो प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देना लाज़िमी है.
उन्होंने फिर दोहराया कि सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई का होना किसी तरह की बाधा नहीं और सरकार को इस मामले पर संसद में क़ानून लाना चाहिए. वो इस मामले को सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससीएसटी उत्पीड़न क़ानून में बदलाव और फिर संसद में लाये गए क़ानून से जोड़ते हैं और कहते हैं कि जब सरकार उस मामले में ऐसा कर सकती है तो फिर राम मंदिर निर्माण के लिए क्यों नहीं.
हालांकि हिंदूत्ववादी संगठन मोदी सरकार से मंदिर पर क़ानून लाने की बात कह रहे हैं लेकिन संविधान के जानकार पहले भी कह चुके हैं कि पहले तो ऐसा कोई भी विधेयक राज्यसभा में पारित नहीं हो पाएगा क्योंकि सरकार को वहां बहुमत नहीं और दूसरे अगर ऐसा हो भी जाता है तो वो सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज हो जाएगा क्योंकि वो संविधान की मूल भावनाओं के विपरीत होगा.
विहिप का, जो राम मंदिर निर्माण को लेकर कुछ महीनों से आंदोलन चला रही है, दावा है कि अगर सरकार संसद में इस मामले पर बिल लाती है तो कोई भी राजनीतिक दल उसका विरोध करने की स्थिति में नहीं होगा. संगठन इस मामले पर 350 सांसदों ने मिलने का दावा भी करती है हालांकि अलोक कुमार ने उन सदस्यों के नाम बताने से इंकार कर दिया जिन्होंने उनसे राम मंदिर पर क़ानून का समर्थन देने का वादा किया है.
पिछले साल दिसंबर में बीजेपी के सहयोगी दल लोकजनशक्ति पार्टी के सांसद चिराग पासवान ने बयान दिया था कि राम मंदिर एनडीए के एजेंडे का हिस्सा नहीं है. यानी मोदी सरकार में शामिल सभी दल इस मामले पर सरकार के साथ नहीं.
विहिप की ये प्रतिक्रिया प्रधानमंत्री के उस बयान के बाद आई है जिसमें नरेंद्र मोदी ने कहा है कि राम मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश की बात क़ानूनी प्रक्रिया के ख़ात्मे के बाद ही सोची जा सकती है.
समाचार एजेंसी एएनआई को दिए गए एक इंटरव्यू में नरेंद्र मोदी ने कहा है, "क़ानूनी प्रक्रिया समाप्त होने दीजिए. क़ानूनी प्रक्रिया समाप्त होने के बाद सरकार के तौर पर हमारी जो भी ज़िम्मेदारी है, हम उसके लिए पूरी कोशिश करेंगे."
नरेंद्र मोदी के साक्षात्कार के ख़त्म होने के कुछ ही देर बार आरएसएस के सह सरकार्यवाहक दत्तात्रेय होसाबले ने बयान जारी कर कहा कि जनता सरकार से उम्मीद करती है कि वो राम मंदिर पर किए गए वायदे को अपने इसी कार्यकाल में पूरा करे.
होसाबले ने मंगलवार को जारी लिखित बयान में कहा है कि 2014 में भारतीय जनता पार्टी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में राम मंदिर निर्माण के लिए संविधान के दायरे के भीतर सभी संभावनाओं को तलाशने का वायदा किया था और जनता ने बीजेपी पर भरोसा कर उसे पूर्ण बहुमत दिया इसलिए सरकार को अपने इसी कार्यकाल में इसे पूरा करना चाहिए.
हालांकि आरएसएस के इस बयान में मंदिर निर्माण के लिए क़ानून की बात नहीं की गई है लेकिन संघ प्रमुख ख़ुद और संगठन के दूसरे बड़े अधिकारी सुरेश सोनी अयोध्या में भव्य मंदिर के निर्माण के लिए अध्यादेश या संसद में क़ानून लाने की बात कहते रहे हैं.
आरएसएस के बयान के कुछ घंटो बाद विहिप ने इस मामले पर दिल्ली में एक प्रेस वार्ता की और क़ानून लाने की बात को फिर से दोहराया.
जब बीबीसी ने विहिप के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार से पूछा कि बीजेपी-आरएसएस-विहिप इसी मामले पर अलग-अलग तरह की बातें क्यों कर रहे हैं? क्या ये अयोध्या मुद्दे को गर्म रखने की कोशिश है?
आलोक कुमार ने जवाब में कहा कि नहीं ये कोई लिखित सक्रिप्ट का हिस्सा नहीं है और चूंकि वो राम मंदिर आंदोलन से दशकों से जुड़े रहे हैं तो प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देना लाज़िमी है.
उन्होंने फिर दोहराया कि सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई का होना किसी तरह की बाधा नहीं और सरकार को इस मामले पर संसद में क़ानून लाना चाहिए. वो इस मामले को सुप्रीम कोर्ट द्वारा एससीएसटी उत्पीड़न क़ानून में बदलाव और फिर संसद में लाये गए क़ानून से जोड़ते हैं और कहते हैं कि जब सरकार उस मामले में ऐसा कर सकती है तो फिर राम मंदिर निर्माण के लिए क्यों नहीं.
हालांकि हिंदूत्ववादी संगठन मोदी सरकार से मंदिर पर क़ानून लाने की बात कह रहे हैं लेकिन संविधान के जानकार पहले भी कह चुके हैं कि पहले तो ऐसा कोई भी विधेयक राज्यसभा में पारित नहीं हो पाएगा क्योंकि सरकार को वहां बहुमत नहीं और दूसरे अगर ऐसा हो भी जाता है तो वो सुप्रीम कोर्ट में चैलेंज हो जाएगा क्योंकि वो संविधान की मूल भावनाओं के विपरीत होगा.
विहिप का, जो राम मंदिर निर्माण को लेकर कुछ महीनों से आंदोलन चला रही है, दावा है कि अगर सरकार संसद में इस मामले पर बिल लाती है तो कोई भी राजनीतिक दल उसका विरोध करने की स्थिति में नहीं होगा. संगठन इस मामले पर 350 सांसदों ने मिलने का दावा भी करती है हालांकि अलोक कुमार ने उन सदस्यों के नाम बताने से इंकार कर दिया जिन्होंने उनसे राम मंदिर पर क़ानून का समर्थन देने का वादा किया है.
पिछले साल दिसंबर में बीजेपी के सहयोगी दल लोकजनशक्ति पार्टी के सांसद चिराग पासवान ने बयान दिया था कि राम मंदिर एनडीए के एजेंडे का हिस्सा नहीं है. यानी मोदी सरकार में शामिल सभी दल इस मामले पर सरकार के साथ नहीं.
Wednesday, December 19, 2018
20 साल में भारतीय हवाई कंपनियों को 2300 विमानों की जरूरत होगी: बोइंग
घरेलू यात्रियों की संख्या बढ़ने से अगले 20 साल में भारतीय हवाई कंपनियों को 2300 विमानों की जरूरत होगी। इसमें 32 हजार करोड़ डॉलर (22.40 लाख करोड़ रुपए) की लागत आ सकती है। एयरक्राफ्ट निर्माता कंपनी बोइंग ने बुधवार को यह अनुमान जताया। इससे पहले बोइंग ने अगस्त में 2100 विमानों की जरूरत की बात कही थी।
नैरो बॉडी के 85% विमानों की जरूरत
बोइंग के मुताबिक, हवाई क्षेत्र में 2018 से 2037 के बीच भारत की जरूरतों को पूरा करने के लिए 85% यानी 1940 नैरो बॉडी और 15% यानी 350 वाइड बॉडी के विमानों की जरूरत पड़ेगी।
चुनौतियों से भरा है भारतीय विमानन क्षेत्र
कंपनी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (एशिया पैसिफिक एंड इंडिया सेल्स) दिनेश केसकर ने कहा कि भारत में विमानन क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि, एक्सचेंज रेट, ईंधन की कीमतें और किराए को देखते हुए यह चुनौतियों से भरा है। यात्रियों की संख्या के मुकाबले कंपनियों की कमाई में इजाफा नहीं हो रहा है।
उन्होंने कहा कि इस साल भारत में 10 लाख यात्रियों ने औसतन हर महीने हवाई सफर किया। यात्रियों की संख्या में हो रही वृद्धि के लिए भारतीय हवाई कंपनियों को ज्यादा सीटें और कम कीमत वाले विमान चाहिए।
बोइंग 737 मैक्स बेहतर विकल्प
बोइंग के मुताबिक, कम बजट और ईंधन की बचत को देखते हुए 737 मैक्स विमान भारतीय कंपनियों के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है। भारतीय कंपनियों के लिए कम ईंधन खर्च करने वाले विमान तैयार किए जा रहे हैं।
'राफेल सौदे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी उठाए सवाल'
मोदी ने कहा, "कांग्रेस ने सेना, सीएनजी और लोकतंत्र के लिए अहम सभी संस्थाओं का अपमान किया। हाल ही में उन्होंने राफेल सौदे को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाए, क्योंकि यह फैसला उन्हें पसंद नहीं आया।''
उन्होंने कहा, ''इससे पहले जब वे सुप्रीम कोर्ट को नहीं धमका सके थे तो उन्होंने चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग भी लाने की कोशिश की थी।''
संवाद के दौरान मोदी ने कार्यकर्ताओं से कहा- कांग्रेस के अलोकतांत्रिक व्यवहार का सही जवाब लोकतंत्र को मजबूत करना है। लोकतंत्र में सूचनाएं और जागरुकता अहम है। हमें लोगों को कांग्रेस के खतरनाक खेल के बारे में जनता को बताना है। उन्हें बताना है कि कांग्रेस का डीएनए अभी भी वही है।
नैरो बॉडी के 85% विमानों की जरूरत
बोइंग के मुताबिक, हवाई क्षेत्र में 2018 से 2037 के बीच भारत की जरूरतों को पूरा करने के लिए 85% यानी 1940 नैरो बॉडी और 15% यानी 350 वाइड बॉडी के विमानों की जरूरत पड़ेगी।
चुनौतियों से भरा है भारतीय विमानन क्षेत्र
कंपनी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (एशिया पैसिफिक एंड इंडिया सेल्स) दिनेश केसकर ने कहा कि भारत में विमानन क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। हालांकि, एक्सचेंज रेट, ईंधन की कीमतें और किराए को देखते हुए यह चुनौतियों से भरा है। यात्रियों की संख्या के मुकाबले कंपनियों की कमाई में इजाफा नहीं हो रहा है।
उन्होंने कहा कि इस साल भारत में 10 लाख यात्रियों ने औसतन हर महीने हवाई सफर किया। यात्रियों की संख्या में हो रही वृद्धि के लिए भारतीय हवाई कंपनियों को ज्यादा सीटें और कम कीमत वाले विमान चाहिए।
बोइंग 737 मैक्स बेहतर विकल्प
बोइंग के मुताबिक, कम बजट और ईंधन की बचत को देखते हुए 737 मैक्स विमान भारतीय कंपनियों के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है। भारतीय कंपनियों के लिए कम ईंधन खर्च करने वाले विमान तैयार किए जा रहे हैं।
'राफेल सौदे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भी उठाए सवाल'
मोदी ने कहा, "कांग्रेस ने सेना, सीएनजी और लोकतंत्र के लिए अहम सभी संस्थाओं का अपमान किया। हाल ही में उन्होंने राफेल सौदे को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाए, क्योंकि यह फैसला उन्हें पसंद नहीं आया।''
उन्होंने कहा, ''इससे पहले जब वे सुप्रीम कोर्ट को नहीं धमका सके थे तो उन्होंने चीफ जस्टिस के खिलाफ महाभियोग भी लाने की कोशिश की थी।''
संवाद के दौरान मोदी ने कार्यकर्ताओं से कहा- कांग्रेस के अलोकतांत्रिक व्यवहार का सही जवाब लोकतंत्र को मजबूत करना है। लोकतंत्र में सूचनाएं और जागरुकता अहम है। हमें लोगों को कांग्रेस के खतरनाक खेल के बारे में जनता को बताना है। उन्हें बताना है कि कांग्रेस का डीएनए अभी भी वही है।
Monday, November 26, 2018
कांग्रेस की राह पर चल रहे CM राव, बिना काम के चुनाव जीतना चाह रहेः PM मोदी
तेलंगाना विधानसभा चुनाव के लिए निजामाबाद में आयोजित चुनावी रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव पर हमला करते हुए कहा कि वह भी कांग्रेस की राह पर है क्योंकि जिस तरह वह बगैर काम के चुनाव जीतती रही उसी तरह वोे भी ऐसा कर चुनाव जीत सकते हैं.
मोदी ने कहा है कि जिनका विकास में विश्वास है, नए भारत के निर्माण में विश्वास है, जिनका नया तेलंगाना बनाने में विश्वास है, वो भारतीय जनता पार्टी को आगे बढ़ा रहे हैं. उन्होंने कहा कि लंबे संघर्ष और युवाओं के बलिदान की वजह से तेलंगाना राज्य का निर्माण हुआ, लेकिन राज्य सरकार ने उनके बलिदान को खत्म कर दिया.
उन्होंने आगे कहा कि तेलंगाना में साढ़े 4 साल गुजर गए, लेकिन राज्य सरकार ने कुछ नहीं किया और राज्य को बर्बाद कर दिया. जिन्होंने यहां के नौजवानों, दलितों, वंचितों, और अन्य लोगों के विकास के वादे किए थे, उन्हें यहां की जनता को अगले चुनाव में सबक सीखाना चाहिए. यहां के मुख्यमंत्री और उनका पूरा परिवार ऐसा मानता है कि इस देश में कांग्रेस ने कुछ नहीं किया.
मोदी ने कांग्रेस के साथ-साथ तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के नेता केसीआर पर निशाना साधते हुए कहा कि वह कांग्रेस की राह पर चल रहे हैं. जिस तरह से कांग्रेस को लगता है कि वह बिना काम किए चुनाव जीत सकती है तो वह भी चुनाव जीत सकते हैं.
समय से पूर्व चुनाव कराए जाने के राज्य सरकार के फैसले पर कहा कि यह अच्छा हुआ कि उन्होंने समय से पहले ही विधानसभा भंग करा दिया जिससे यहां की जनता को दुर्दशा से कुछ दिन पहले निजात मिल गई.
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने वादा किया था कि नजीमाबाद को लंदन जैसा बना देंगे, लेकिन यहां की स्थिति देखिए. क्षेत्र विकास में काफी पीछे चला गया.
तेलंगाना में 2 रैली
तेलंगाना विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के लिए टीआरएस, बीजेपी और कांग्रेस पूरा ताकत लगा रही हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तेलंगाना के रण में पहली बार मंगलवार को उतर रहे हैं. वो दो चुनावी जनसभा को संबोधित करेंगे.
पीएम मोदी की पहली रैली तेलंगाना के निजामाबाद में दोपहर में उसके बाद दूसरी जनसभा दिन में करीब ढाई बजे महबूबनगर में होगी. इसके बाद सोमवार को यानी 3 दिसंबर को असदुद्दीन ओवैसी के गढ़ हैदराबाद में पीएम की एक बड़ी जनसभा प्रस्तावित है.
बता दें कि प्रदेश की 119 विधानसभा सीटों के लिए 7 दिसंबर को मतदान होंगे और नतीजे 11 दिसंबर को आएंगे. मौजूदा समय में तेलंगाना में बीजेपी के पास 5 विधायक हैं.
पीएम मोदी ही नहीं बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह भी तेलंगाना के राजनीतिक समर में उतरेंगे. शाह बुधवार को रैली संबोधित करेंगे और इसके बाद रविवार को यानी 2 दिसंबर को दोबारा से पहुंचेंगे. हालांकि बीजेपी अध्यक्ष इससे पहले तेलंगाना में दो चुनावी रैलियों को संबोधित कर चुके हैं.
वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी गुरुवार को तेलंगाना विधानसभा चुनाव की सियायी रणभूमि में उतरेंगे. वे पारिगी और हैदराबाद के पास चेवेल्ला में रोड शो के जरिए माहौल बनाने की कोशिश करेंगे. हालांकि, राहुल गांधी ने 23 नवंबर को यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ हैदराबाद के बाहरी इलाके स्थित मेडचल में एक जनसभा को संबोधित किया था.
टीडीपी अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के तेलंगाना विधानसभा चुनाव प्रचार अभियान में बुधवार और गुरुवार को उतरने की उम्मीद है.
बता दें कि तेलंगाना विधानसभा चुनाव में बीजेपी अकेले ही चुनाव लड़ रही है. जबकि कांग्रेस टीडीपी, सीपीएम और तेलंगाना जन समिति (टीजेएस) के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है. इन सभी का मुकाबला सत्ताधारी तेलंगाना राष्ट्र समित (टीआरएस) से हैं.
टीआरएस अध्यक्ष और मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव पूरे राज्य में रैलियों को लगातार संबोधित कर रहे हैं. इसके अलावा उनके बेटे और तेलंगाना सरकार में मंत्री रहे के टी रामाराव भी चुनावी प्रचार की कमान संभाले हुए हैं.
मोदी ने कहा है कि जिनका विकास में विश्वास है, नए भारत के निर्माण में विश्वास है, जिनका नया तेलंगाना बनाने में विश्वास है, वो भारतीय जनता पार्टी को आगे बढ़ा रहे हैं. उन्होंने कहा कि लंबे संघर्ष और युवाओं के बलिदान की वजह से तेलंगाना राज्य का निर्माण हुआ, लेकिन राज्य सरकार ने उनके बलिदान को खत्म कर दिया.
उन्होंने आगे कहा कि तेलंगाना में साढ़े 4 साल गुजर गए, लेकिन राज्य सरकार ने कुछ नहीं किया और राज्य को बर्बाद कर दिया. जिन्होंने यहां के नौजवानों, दलितों, वंचितों, और अन्य लोगों के विकास के वादे किए थे, उन्हें यहां की जनता को अगले चुनाव में सबक सीखाना चाहिए. यहां के मुख्यमंत्री और उनका पूरा परिवार ऐसा मानता है कि इस देश में कांग्रेस ने कुछ नहीं किया.
मोदी ने कांग्रेस के साथ-साथ तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के नेता केसीआर पर निशाना साधते हुए कहा कि वह कांग्रेस की राह पर चल रहे हैं. जिस तरह से कांग्रेस को लगता है कि वह बिना काम किए चुनाव जीत सकती है तो वह भी चुनाव जीत सकते हैं.
समय से पूर्व चुनाव कराए जाने के राज्य सरकार के फैसले पर कहा कि यह अच्छा हुआ कि उन्होंने समय से पहले ही विधानसभा भंग करा दिया जिससे यहां की जनता को दुर्दशा से कुछ दिन पहले निजात मिल गई.
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने वादा किया था कि नजीमाबाद को लंदन जैसा बना देंगे, लेकिन यहां की स्थिति देखिए. क्षेत्र विकास में काफी पीछे चला गया.
तेलंगाना में 2 रैली
तेलंगाना विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज करने के लिए टीआरएस, बीजेपी और कांग्रेस पूरा ताकत लगा रही हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तेलंगाना के रण में पहली बार मंगलवार को उतर रहे हैं. वो दो चुनावी जनसभा को संबोधित करेंगे.
पीएम मोदी की पहली रैली तेलंगाना के निजामाबाद में दोपहर में उसके बाद दूसरी जनसभा दिन में करीब ढाई बजे महबूबनगर में होगी. इसके बाद सोमवार को यानी 3 दिसंबर को असदुद्दीन ओवैसी के गढ़ हैदराबाद में पीएम की एक बड़ी जनसभा प्रस्तावित है.
बता दें कि प्रदेश की 119 विधानसभा सीटों के लिए 7 दिसंबर को मतदान होंगे और नतीजे 11 दिसंबर को आएंगे. मौजूदा समय में तेलंगाना में बीजेपी के पास 5 विधायक हैं.
पीएम मोदी ही नहीं बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह भी तेलंगाना के राजनीतिक समर में उतरेंगे. शाह बुधवार को रैली संबोधित करेंगे और इसके बाद रविवार को यानी 2 दिसंबर को दोबारा से पहुंचेंगे. हालांकि बीजेपी अध्यक्ष इससे पहले तेलंगाना में दो चुनावी रैलियों को संबोधित कर चुके हैं.
वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी गुरुवार को तेलंगाना विधानसभा चुनाव की सियायी रणभूमि में उतरेंगे. वे पारिगी और हैदराबाद के पास चेवेल्ला में रोड शो के जरिए माहौल बनाने की कोशिश करेंगे. हालांकि, राहुल गांधी ने 23 नवंबर को यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ हैदराबाद के बाहरी इलाके स्थित मेडचल में एक जनसभा को संबोधित किया था.
टीडीपी अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के तेलंगाना विधानसभा चुनाव प्रचार अभियान में बुधवार और गुरुवार को उतरने की उम्मीद है.
बता दें कि तेलंगाना विधानसभा चुनाव में बीजेपी अकेले ही चुनाव लड़ रही है. जबकि कांग्रेस टीडीपी, सीपीएम और तेलंगाना जन समिति (टीजेएस) के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है. इन सभी का मुकाबला सत्ताधारी तेलंगाना राष्ट्र समित (टीआरएस) से हैं.
टीआरएस अध्यक्ष और मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव पूरे राज्य में रैलियों को लगातार संबोधित कर रहे हैं. इसके अलावा उनके बेटे और तेलंगाना सरकार में मंत्री रहे के टी रामाराव भी चुनावी प्रचार की कमान संभाले हुए हैं.
Tuesday, November 13, 2018
स्पाइडरमैन-हल्क जैसे किरदार रचने वाले स्टैन ली का 95 साल की उम्र में निधन
अमेरिका के मशहूर कॉमिक लेखक स्टैन ली का 95 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने स्पाइडर मैन और द हल्क जैसे सुपरहीरो कैरेक्टर रचकर एक क्रांति ला दी थी। ली अमेरिका में कॉमिक कल्चर लेकर आए। बीते कुछ सालों से वह कई बीमारियों से पीड़ित थे।
ली की बेटी ने हॉलीवुड की एक मैगजीन टीएमजेड को बताया, "मेरे पिता अपने सभी फैन्स से प्यार करते थे। वह एक महान और शानदार व्यक्ति थे।'' न्यूयॉर्क में रहने वाले ली अपने चश्मे के चलते जाने जाते थे और वह अकसर समारोहों में दिखाई देते थे।
अंकल ने दिलाई पहली नौकरी
स्टैन ली को उनके अंकल ने किशोरावस्था में पहली नौकरी दिलाई। इसमें ली को बतौर फिलिंग आर्टिस्ट कार्टून कैरेक्टर में स्याही भरनी होती थी। एक बार ली ने कहा था, "मुझे एक दिन लगा था कि मैंने एक महान अमेरिकी नॉवेल लिखा और उसमें अपने सही नाम का इस्तेमाल नहीं किया।'' उनका सही नाम स्टैनली लीबर था। ली ने जो कैरेक्टर बनाए उनमें असाधारण शक्ति थी। लोगों को उनमें पूरे ब्रह्मांड में राज करने की ताकत नजर आती थी। ली के बनाए सुपरहीरो दशकों तक छाए रहे।
ब्रांड बन चुके हैं ली के कैरेक्टर
स्पाइडरमैन हो या ब्लैक पेंथर, एक्समैन, फेंटास्टिक फोर, आयरन मैन, थोर, डॉक्टर स्ट्रेंज, ये सारे एक ब्रांड बन चुके हैं। स्पाइडर मैन, थोर, आयरन मैन की हॉलीवुड में कई फिल्मों की सीरीज आ चुकी हैं। ये फिल्में पिछले एक दशक में 1.3 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा कमा चुकी हैं। इस लिहाज से उनकी एक फिल्म की औसत कमाई 6500 करोड़ रुपए रही।
फिल्मों में छोटा सा रोल भी करते थे
अपने कैरेक्टर पर बनने वाली फिल्म में ली एक छोटा सा रोल भी करते थे। 'एवेंजर्स: इनफिनिटी वॉर' में ली एक बस ड्राइवर के रोल में दिखाई दिए थे। सॉ और इनसाइडस जैसी फिल्मों के निर्देशक और ऑस्ट्रेलियाई फिल्मकार ने जेम्स वॉन ने ट्वीट किया, "ली सही मायने में लेजेंड थे। मेरे दर्शक उनके बिना अच्छा महसूस नहीं करेंगे। मैं उनके काम के लिए किस तरह शुक्रिया अदा करूं, यह समझ नहीं आता।''
इस साल की शुरुआत में ही तय हो गया था कि विराट कोहली की अगुआई में टीम इंडिया को तीन मुश्किल चुनौतियों से जूझना होगा। दक्षिण अफ्रीका दौरा, इंग्लैंड दौरा और ऑस्ट्रेलिया दौरा ये तीन चुनौतियां थीं। टेस्ट क्रिकेट में इन तीनों ही देशों में भारत का रिकॉर्ड अच्छा नहीं था। दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया में टीम इंडिया कभी कोई सीरीज नहीं जीत सकी थी। वहीं, इंग्लैंड में पिछले दो दौरे पर करारी हार मिली थी। इस बार दक्षिण अफ्रीका में भारत ने कड़ा संघर्ष किया लेकिन, 1-2 से हार मिली। इंग्लैंड में पांच मैचों की सीरीज 1-4 से गंवाई। अब बारी है ऑस्ट्रेलिया दौरे की।
ऑस्ट्रेलिया में आठ सीरीज हार चुकी है टीम इंडिया
टीम इंडिया 1947 से ऑस्ट्रेलिया का दौरा कर रही है। तब से अब तक टीम इंडिया 11 बार ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज खेल चुकी है। इनमें से 8 सीरीज में हमें हार का सामना करना पड़ा। वहीं तीन सीरीज ड्रॉ रही। पिछले लगातार तीन ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भारतीय टीम ने टेस्ट सीरीज गंवाई है। ऑस्ट्रेलिया में भारत की मुश्किल का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि वहां टीम अब तक 44 टेस्ट में सिर्फ पांच ही जीत पाई है। उसे 28 में हार का सामना करना पड़ा है और 11 मुकाबले ड्रॉ रहे हैं।
गांगुली-गावस्कर ही ऑस्ट्रेलिया को उसकी धरती पर हरा पाए
भारत की ओर से कुल 13 खिलाड़ियों ने ऑस्ट्रेलिया में टीम की कप्तानी की है। इनमें से नौ को एक भी जीत नसीब नहीं हुई। सुनील गावस्कर और सौरव गांगुली ही ऐसे कप्तान रहे हैं जिनके हिस्से ऑस्ट्रेलिया में जीत और हार बराबर की संख्या में आए। धोनी को ऑस्ट्रेलिया में पांच में से चार टेस्ट मैचों में हार का सामना करना पड़ा।
इस बार टीम इंडिया जीत की तगड़ी दावेदार, ये हैं कारण
बॉल टैम्परिंग के कारण स्मिथ और वार्नर पर प्रतिबंध
टीम इंडिया के पिछले ऑस्ट्रेलिया दौरे से लेकर अब तक ऑस्ट्रेलिया की ओर से सबसे ज्यादा रन बनाने वाले दो बल्लेबाज स्टीव स्मिथ और डेविड वार्नर हैं। इस टाइम पीरियड में स्मिथ ने 42 टेस्ट में 4664 रन और वार्नर ने 42 टेस्ट में 3657 रन बनाए हैं। दोनों ही खिलाड़ी अभी बॉल टैम्परिंग मामले में बैन झेल रहे हैं। हालांकि, बैन हटाने की मांग तेज हो रही है।
ली की बेटी ने हॉलीवुड की एक मैगजीन टीएमजेड को बताया, "मेरे पिता अपने सभी फैन्स से प्यार करते थे। वह एक महान और शानदार व्यक्ति थे।'' न्यूयॉर्क में रहने वाले ली अपने चश्मे के चलते जाने जाते थे और वह अकसर समारोहों में दिखाई देते थे।
अंकल ने दिलाई पहली नौकरी
स्टैन ली को उनके अंकल ने किशोरावस्था में पहली नौकरी दिलाई। इसमें ली को बतौर फिलिंग आर्टिस्ट कार्टून कैरेक्टर में स्याही भरनी होती थी। एक बार ली ने कहा था, "मुझे एक दिन लगा था कि मैंने एक महान अमेरिकी नॉवेल लिखा और उसमें अपने सही नाम का इस्तेमाल नहीं किया।'' उनका सही नाम स्टैनली लीबर था। ली ने जो कैरेक्टर बनाए उनमें असाधारण शक्ति थी। लोगों को उनमें पूरे ब्रह्मांड में राज करने की ताकत नजर आती थी। ली के बनाए सुपरहीरो दशकों तक छाए रहे।
ब्रांड बन चुके हैं ली के कैरेक्टर
स्पाइडरमैन हो या ब्लैक पेंथर, एक्समैन, फेंटास्टिक फोर, आयरन मैन, थोर, डॉक्टर स्ट्रेंज, ये सारे एक ब्रांड बन चुके हैं। स्पाइडर मैन, थोर, आयरन मैन की हॉलीवुड में कई फिल्मों की सीरीज आ चुकी हैं। ये फिल्में पिछले एक दशक में 1.3 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा कमा चुकी हैं। इस लिहाज से उनकी एक फिल्म की औसत कमाई 6500 करोड़ रुपए रही।
फिल्मों में छोटा सा रोल भी करते थे
अपने कैरेक्टर पर बनने वाली फिल्म में ली एक छोटा सा रोल भी करते थे। 'एवेंजर्स: इनफिनिटी वॉर' में ली एक बस ड्राइवर के रोल में दिखाई दिए थे। सॉ और इनसाइडस जैसी फिल्मों के निर्देशक और ऑस्ट्रेलियाई फिल्मकार ने जेम्स वॉन ने ट्वीट किया, "ली सही मायने में लेजेंड थे। मेरे दर्शक उनके बिना अच्छा महसूस नहीं करेंगे। मैं उनके काम के लिए किस तरह शुक्रिया अदा करूं, यह समझ नहीं आता।''
इस साल की शुरुआत में ही तय हो गया था कि विराट कोहली की अगुआई में टीम इंडिया को तीन मुश्किल चुनौतियों से जूझना होगा। दक्षिण अफ्रीका दौरा, इंग्लैंड दौरा और ऑस्ट्रेलिया दौरा ये तीन चुनौतियां थीं। टेस्ट क्रिकेट में इन तीनों ही देशों में भारत का रिकॉर्ड अच्छा नहीं था। दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया में टीम इंडिया कभी कोई सीरीज नहीं जीत सकी थी। वहीं, इंग्लैंड में पिछले दो दौरे पर करारी हार मिली थी। इस बार दक्षिण अफ्रीका में भारत ने कड़ा संघर्ष किया लेकिन, 1-2 से हार मिली। इंग्लैंड में पांच मैचों की सीरीज 1-4 से गंवाई। अब बारी है ऑस्ट्रेलिया दौरे की।
ऑस्ट्रेलिया में आठ सीरीज हार चुकी है टीम इंडिया
टीम इंडिया 1947 से ऑस्ट्रेलिया का दौरा कर रही है। तब से अब तक टीम इंडिया 11 बार ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट सीरीज खेल चुकी है। इनमें से 8 सीरीज में हमें हार का सामना करना पड़ा। वहीं तीन सीरीज ड्रॉ रही। पिछले लगातार तीन ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भारतीय टीम ने टेस्ट सीरीज गंवाई है। ऑस्ट्रेलिया में भारत की मुश्किल का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि वहां टीम अब तक 44 टेस्ट में सिर्फ पांच ही जीत पाई है। उसे 28 में हार का सामना करना पड़ा है और 11 मुकाबले ड्रॉ रहे हैं।
गांगुली-गावस्कर ही ऑस्ट्रेलिया को उसकी धरती पर हरा पाए
भारत की ओर से कुल 13 खिलाड़ियों ने ऑस्ट्रेलिया में टीम की कप्तानी की है। इनमें से नौ को एक भी जीत नसीब नहीं हुई। सुनील गावस्कर और सौरव गांगुली ही ऐसे कप्तान रहे हैं जिनके हिस्से ऑस्ट्रेलिया में जीत और हार बराबर की संख्या में आए। धोनी को ऑस्ट्रेलिया में पांच में से चार टेस्ट मैचों में हार का सामना करना पड़ा।
इस बार टीम इंडिया जीत की तगड़ी दावेदार, ये हैं कारण
बॉल टैम्परिंग के कारण स्मिथ और वार्नर पर प्रतिबंध
टीम इंडिया के पिछले ऑस्ट्रेलिया दौरे से लेकर अब तक ऑस्ट्रेलिया की ओर से सबसे ज्यादा रन बनाने वाले दो बल्लेबाज स्टीव स्मिथ और डेविड वार्नर हैं। इस टाइम पीरियड में स्मिथ ने 42 टेस्ट में 4664 रन और वार्नर ने 42 टेस्ट में 3657 रन बनाए हैं। दोनों ही खिलाड़ी अभी बॉल टैम्परिंग मामले में बैन झेल रहे हैं। हालांकि, बैन हटाने की मांग तेज हो रही है।
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